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मुफ़्त वकील आपका हक़ है

हर औरत मुफ़्त कानूनी मदद की हक़दार है, कोई आमदनी की शर्त नहीं।

सुनिए मुफ़्त वकील आपका हक़ है

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कानूनी आधार

  • विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, १९८७ की धारा १२(c): हर औरत मुफ़्त क़ानूनी सहायता की हक़दार है — महिलाओं के लिए आय की कोई सीमा नहीं। यह संविधान के अनुच्छेद ३९A से निकला हक़ है।
  • मुफ़्त मतलब सच में मुफ़्त: पैनल के वकील की फ़ीस, आवेदन लिखवाना, अदालत की फ़ीस, टाइपिंग, प्रमाणित प्रतियाँ — सारा ख़र्च विधिक सेवा प्राधिकरण उठाता है, ज़िला अदालत से सर्वोच्च न्यायालय तक (nalsa.gov.in पर १२ अगस्त २०२६ को जाँचा गया)।
  • कैसे मिलेगा: ज़िला अदालत में DLSA के फ़्रंट ऑफ़िस जाएँ; या १५१६ पर कॉल करें (निःशुल्क); या बिना लॉगिन ऑनलाइन आवेदन दें (nalsa.gov.in → e-Services → Legal Aid Application); या गाँव के क़ानूनी सहायता केंद्र / पैरा-लीगल स्वयंसेवक (PLV) से — जो पढ़-लिख न सके, उसका फ़ॉर्म PLV भर देगा।
  • पीड़ित मुआवज़ा भी इसी रास्ते से: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा ३९६ (पहले दंड प्रक्रिया संहिता की धारा ३५७A) के तहत हर राज्य की पीड़ित मुआवज़ा योजना चलती है — बलात्कार, तेज़ाब हमला, गंभीर चोट, या कमाने वाले की मृत्यु जैसे मामलों में राज्य / ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण मुआवज़ा तय करता है। मुक़दमे के अंत तक इंतज़ार ज़रूरी नहीं — अदालत बीच में अंतरिम मुआवज़ा भी भिजवा सकती है, और आरोपी न पकड़ा जाए तब भी मुआवज़ा मिल सकता है। बलात्कार और POCSO पीड़िताओं के लिए NALSA की २०१८ वाली योजना कम-से-कम रक़म तय करती है। आवेदन DLSA से मुफ़्त, और nalsa.gov.in पर ऑनलाइन भी।
  • लोक अदालत (DLSA से) मुफ़्त में झगड़े निपटाती है; उसका अवॉर्ड अदालत के फ़ैसले जितना पक्का होता है।

एक कदम आज

आज फ़ोन में दो नंबर सेव करें, १५१६ और १८१।

कहाँ जाएँ

  • NALSA: nalsa.gov.in • हेल्पलाइन १५१६ • e-Services से ऑनलाइन आवेदन (बिना लॉगिन) • NALSA ऐप।
  • राज्य / ज़िला: हर राज्य की SLSA साइट <state>.nalsa.gov.in पर (दिल्ली: dslsa.org); DLSA का दफ़्तर ज़िला अदालत के अंदर।
  • पीड़ित मुआवज़े का आवेदन भी DLSA या राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण से — मुफ़्त।
  • न्याय बंधु (UMANG ऐप से) — मुफ़्त लड़ने वाले वकील।
  • सर्वोच्च न्यायालय के मामलों के लिए: sclsc.gov.in।
असली ज़िंदगी में
  • 'वकील का ख़र्च कौन उठाएगा?' — औरत के लिए सीधा जवाब: सरकार, क़ानून के तहत। फ़ीस के डर से हक़ मत छोड़िए।
  • अदालत के गेट पर खड़े दलालों को 'सरकारी वकील दिलवाने' के पैसे देना — DLSA का फ़्रंट ऑफ़िस अदालत के अंदर ही है और मुफ़्त है।
  • 'मुफ़्त मतलब कमज़ोर वकील' मान लेना — पैनल के वकील DLSA के प्रति जवाबदेह हैं, और बात न बने तो पैनल से दूसरा वकील माँगा जा सकता है (NALSA के नियम इजाज़त देते हैं)।
  • 'आय प्रमाण पत्र लगेगा' सोचना — महिलाओं की पात्रता श्रेणी से है, आय से नहीं।
  • आवेदन पर मिला डायरी नंबर खो देना — उसी से आवेदन का पता चलता है।
  • 'मैं पढ़-लिख नहीं सकती, फ़ॉर्म कैसे भरूँ' — PLV इसी काम के लिए हैं; वे फ़ॉर्म भर देंगे, आपको बस हस्ताक्षर या अंगूठा लगाना है।
सँभाल कर रखें
  • आज ही फ़ोन में दो नंबर सहेजें: १५१६ (मुफ़्त वकील) और १८१ (महिला हेल्पलाइन)।
  • लड़ाई से पहले सलाह: DLSA के फ़्रंट ऑफ़िस पर बिना मुक़दमा दायर किए भी मुफ़्त सलाह मिलती है — जाना मुश्किल हो तो गाँव का क़ानूनी सहायता केंद्र या PLV बुलवा लें।
  • मुक़दमे के लिए: DLSA में आवेदन (ख़ुद जाकर या ऑनलाइन), डायरी नंबर लिख लें, और उसका पता करती रहें।
  • समझौता हो सकने वाले मामले (भत्ते की रक़म, पारिवारिक संपत्ति): DLSA से अगली लोक अदालत के बारे में पूछें, और नज़दीकी पुलिस थाने या ज़िला अदालत के मध्यस्थता केंद्र के बारे में भी — दोनों में ख़र्च नहीं लगता।
  • NALSA का मोबाइल ऐप (Android/iOS) — फ़ोन से ही आवेदन लग जाता है और उसका पता भी चलता रहता है।

सेव करने से पहले सोच लें। फ़ोन किसी और के पास तो नहीं?

यह भी जानिए

यह जानकारी है, सलाह नहीं वकील ने जाँचा है जाँचा गया: १३ अगस्त २०२६