सभी १० कार्ड
कार्ड ५/१०

बेटी का बराबर हिस्सा

बेटी जन्म से ही बेटे के बराबर हिस्सेदार है।

सुनिए बेटी का बराबर हिस्सा

०:०० ०:००

कानूनी आधार

  • हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, १९५६ की धारा ६ (२००५ का संशोधन): बेटी जन्म से ही पैतृक संपत्ति में बेटे के बराबर हिस्सेदार है। सर्वोच्च न्यायालय (विनीता शर्मा बनाम राकेश शर्मा, २०२०): यह हक़ तब भी है जब पिता ९.९.२००५ को जीवित न रहे हों।
  • अगर कोई हिंदू पुरुष बिना वसीयत के गुज़र जाए, तो उसकी ख़ुद की कमाई हुई संपत्ति श्रेणी-I के वारिसों में बराबर बँटती है — पत्नी, माँ, बेटे और बेटियाँ। शादी हो जाने से बेटी का हिस्सा कम नहीं होता।
  • दायरा: यह नियम हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख पर लगता है। मुस्लिम, ईसाई और पारसी के नियम अलग हैं (मुस्लिम पर्सनल लॉ; भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, १९२५ ) — कार्ड की यह पंक्ति वकील पक्की करेंगे।
  • धोखे, दबाव या बहकावे में हस्ताक्षर करवाया गया 'हक़-त्याग' या रिलीज़ का काग़ज़ रद्द करवाया जा सकता है (अनुबंध अधिनियम के सिद्धांत) — पर असली बचाव एक ही है: हस्ताक्षर से पहले मुफ़्त सलाह।

एक कदम आज

कोई भी काग़ज़ साइन करने से पहले १५१६ पर मुफ़्त सलाह लें।

कहाँ जाएँ

  • DLSA — किसी भी काग़ज़ पर हस्ताक्षर से पहले मुफ़्त सलाह; बँटवारे या हक़ के मुक़दमे के लिए मुफ़्त वकील • १५१६ • scourtapp.nic.in/lsams।
  • लोक अदालत पारिवारिक समझौते के लिए; वरना मुफ़्त क़ानूनी सहायता से दीवानी अदालत।
  • नामांतरण के लिए तहसील या राजस्व दफ़्तर; प्रति के लिए राज्य का भूमि-अभिलेख पोर्टल।
  • संस्थाओं की मदद: लैंडेसा (महिला भूमि अधिकार) • WGWLO (गुजरात) • आली (उत्तर प्रदेश)।
असली ज़िंदगी में
  • 'शादी हो गई, अब मायके की संपत्ति से क्या लेना' — क़ानून उल्टा कहता है; शादीशुदा बेटियाँ बराबर की वारिस हैं।
  • किसी पारिवारिक समारोह में 'बस औपचारिकता है' कह कर काग़ज़ पर हस्ताक्षर करवाना — अक्सर वही काग़ज़ आपका हिस्सा ख़त्म करने वाला हक़-त्याग विलेख होता है।
  • 'भाई सँभाल लेंगे, तुम्हारे नाम की क्या ज़रूरत' — भाई का सँभालना आपका मालिक बन जाना नहीं है।
  • पंजीकृत हक़ छोड़ने के बदले सिर्फ़ ज़ुबानी वादे ('बाद में पैसे दे देंगे')।
  • बिना पढ़े 'गवाह के तौर पर' हस्ताक्षर करना — गवाही के पन्ने को सहमति का पन्ना बना दिया जाता है।
  • 'वसीयत में नाम नहीं, अब कुछ नहीं हो सकता' मान लेना — शक वाली वसीयत को चुनौती दी जा सकती है; हाथ खड़े करने से पहले सलाह लें।
सँभाल कर रखें
  • मोटे तौर पर पता रखें कि संपत्ति क्या-क्या है (ज़मीन, घर, जमा पूँजी, बैंक के खाते में रखा धन); जो काग़ज़ क़ानूनन आप रख सकती हैं, उनकी प्रति रखें।
  • अपने राज्य के भूमि-अभिलेख पोर्टल पर रिकॉर्ड ख़ुद देखें (UP भूलेख, राजस्थान अपना खाता, महाराष्ट्र महाभूलेख; राष्ट्रीय: dilrmp.gov.in) — रिकॉर्ड देखने के लिए किसी की इजाज़त नहीं चाहिए।
  • उत्तराधिकार मिलने पर नामांतरण (म्यूटेशन) करवाएँ ताकि राजस्व या सोसाइटी के रिकॉर्ड में आपका नाम चढ़े।
  • कोई भी हक़-त्याग का काग़ज़ DLSA की मुफ़्त सलाह के बिना कभी हस्ताक्षर न करें — सलाह मुफ़्त है और उसी हफ़्ते मिल सकती है।
  • मृत्यु प्रमाण पत्र और वारिस प्रमाण पत्र की प्रति सँभाल कर रखें (कार्ड ७ देखें)।

सेव करने से पहले सोच लें। फ़ोन किसी और के पास तो नहीं?

यह भी जानिए

यह जानकारी है, सलाह नहीं वकील ने जाँचा है जाँचा गया: १३ अगस्त २०२६