सभी १० कार्ड देखें
घर में रहने का हक़
घर आपके नाम पर न हो, तब भी रहने का हक़ है।
सुनिए घर में रहने का हक़
०:०० ०:००
कानूनी आधार
- घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम की धारा १७: घरेलू रिश्ते में हर औरत को 'साझे घर' — जिस घर में वह रहती है — में रहने का हक़ है, चाहे घर उसके नाम पर हो या न हो। बिना क़ानूनी प्रक्रिया के उसे निकाला नहीं जा सकता।
- धारा १९ में अदालत आदेश दे सकती है: आपको निकाला नहीं जाएगा, घर बेचा नहीं जाएगा, सताने वाले को घर से हटाया जाए, या वैसे ही स्तर का दूसरा घर दिया जाए।
- सर्वोच्च न्यायालय (सतीश चंदर आहूजा बनाम स्नेहा आहूजा, २०२०) ने 'साझे घर' का दायरा बढ़ाया: इसमें ससुराल का वह घर भी आ सकता है जहाँ आप घरेलू रिश्ते में रहती आई हैं — और वसीयत के अनुसार घर पर बेटे का अधिकार है।
- अगर पति रहने की जगह ही नहीं देता, तो सिर्फ़ एक नहीं, कई रास्ते हैं: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा १४४ में गुज़ारा भत्ते के साथ रहने का ख़र्च भी माँगा जा सकता है; घरेलू हिंसा क़ानून की धारा १९(१)(f) में अदालत वैसे ही स्तर का दूसरा घर या उसका किराया दिलवा सकती है; हिंदू विवाह अधिनियम की धारा २४ में मुक़दमा चलते समय का ख़र्च, और हिंदू दत्तक ग्रहण एवं भरण-पोषण अधिनियम की धारा १८ में — जायज़ वजह से अलग रहने पर भी — पत्नी को रहने और ख़र्च का हक़ है।
एक कदम आज
उस पते वाले काग़ज़ इकट्ठे करें, आधार, राशन कार्ड, बिजली का बिल।
कहाँ जाएँ
- सखी केंद्र (१८१) से अदालत तक — घर में रहने का आदेश, घरेलू हिंसा क़ानून के रास्ते, मुफ़्त • ज़बरदस्ती हो तो ११२।
- DLSA १५१६ / scourtapp.nic.in/lsams — धारा १९ के आदेश के लिए मुफ़्त वकील।
- पुलिस सुनवाई न करे तो राष्ट्रीय महिला आयोग: ncwapps.nic.in/onlinecomplaintsv2।
- संस्थाओं की मदद: मजलिस (मुंबई), शक्ति शालिनी (दिल्ली, रुकने की जगह + २४x७ लाइन ०११-२४३७३७३७ / व्हाट्सएप ७८३८९५७८१०), HRLN (hrln.org); बीच के समय के लिए स्वाधार गृह / शक्ति सदन सरकारी आश्रय गृह।
प्रोटेक्शन ऑफ़िसर → मजिस्ट्रेट (धारा १९ का ऑर्डर) · वन स्टॉप सेंटर · पुलिस
किससे मिलें: प्रोटेक्शन ऑफ़िसर
असली ज़िंदगी में
- 'घर मेरे नाम पर नहीं है, तो निकल जाओ' — घर के काग़ज़ पर आपका नाम हो या न हो, रहने के हक़ से इसका कोई लेना-देना नहीं।
- आप मायके गई हों और पीछे से ताला बदल देना; झगड़े के समय बाहर से बंद कर देना।
- आपका सामान बाहर फेंक देना, या दबाव बनाने के लिए भंडार-कक्ष या नौकरों के कमरे में भेज देना।
- 'यह मेरे माँ-बाप का घर है, इसका कोई हक़ नहीं' — २०२० के फ़ैसले के बाद, जिस ससुराल के घर में आप रहती आई हैं, वह भी साझा घर हो सकता है।
- दबाव में 'मैं अपनी मर्ज़ी से घर छोड़ रही हूँ' जैसा कोई काग़ज़, हक़-त्याग या रहने की इजाज़त वाला काग़ज़ हस्ताक्षर करवाना।
- गुज़ारे या घरेलू हिंसा का मुक़दमा चलते समय घर से निकालने की धमकी देना।
सँभाल कर रखें
- रहने का सबूत सँभालें: उस पते वाला आधार, राशन कार्ड, बिजली-पानी के बिल, बच्चों के स्कूल के काग़ज़, सामान की डिलीवरी का पता।
- अगर ताला लग जाए या निकाल दिया जाए, उसी हफ़्ते क़दम उठाएँ — पुलिस / सखी केंद्र (१८१) में शिकायत; देरी आपके ख़िलाफ़ पड़ती है।
- घर छोड़ने से जुड़ा कोई भी काग़ज़ DLSA की मुफ़्त सलाह के बिना हस्ताक्षर न करें।
- सामान और कमरों की फ़ोटो रखें; अगर निकाला जाए, तो अंदर क्या छूटा उसकी सूची बनाएँ।
सेव करने से पहले सोच लें। फ़ोन किसी और के पास तो नहीं?