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कर्ज़ आपका नहीं है

पति के लोन की ज़िम्मेदारी अपने-आप आप पर नहीं आती।

सुनिए कर्ज़ आपका नहीं है

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कानूनी आधार

  • पति के अपने क़र्ज़ की ज़िम्मेदारी पत्नी पर अपने-आप नहीं आती। अनुबंध सिर्फ़ हस्ताक्षर करने वालों को बाँधता है; ज़मानत तभी बनती है जब आपने सच में ज़मानतदार के तौर पर हस्ताक्षर किए हों (अनुबंध अधिनियम की धारा १२६) — और दबाव, धोखे या बहकावे से लिया गया हस्ताक्षर रद्द करवाया जा सकता है (धाराएँ १५–१९)।
  • RBI के नियम बैंक, NBFC और उनके वसूली एजेंटों पर लागू हैं: कॉल या घर आना सिर्फ़ सुबह ८ से शाम ७ तक, धमकी या बेइज़्ज़ती नहीं, और आने वाले को अपना और कंपनी का नाम बताना होगा; डिजिटल ऋण देने वालों पर अलग से डिजिटल लेंडिंग दिशानिर्देश लागू हैं।
  • RBI एकीकृत लोकपाल योजना: १ जुलाई २०२६ से 'रिज़र्व बैंक - इंटीग्रेटेड ओम्बड्समैन स्कीम, २०२६' ने २०२१ वाली योजना की जगह ले ली है। रास्ता वही है — पहले अपने बैंक या NBFC के शिकायत अधिकारी को लिखित शिकायत; ३० दिन में जवाब या हल न मिले, तब cms.rbi.org.in पर मुफ़्त शिकायत करें। पर अब समय-सीमा छोटी है: पहले एक साल थी, अब ऋणदाता के ३० दिन पूरे होने के बाद सिर्फ़ ९० दिन। वसूली एजेंटों की परेशानी इसकी सूची में साफ़ लिखी है। RBI हेल्पलाइन १४४४८ (२४x७; सोमवार–शनिवार सुबह ८ से रात १० तक कर्मचारी; हिंदी समेत ११ भाषाएँ)।
  • बिना पंजीकरण वाले ऋणदाता और ग़ैर-क़ानूनी लोन ऐप लोकपाल के दायरे से बाहर हैं — इनकी शिकायत RBI के सचेत पोर्टल पर करें (sachet.rbi.org.in, १२ अगस्त २०२६ को चालू पाया गया); सचेत पर यह भी देख सकती हैं कि कोई कंपनी RBI के नियम में है या नहीं।
  • वसूली एजेंट की धमकी, घर में घुसना, या मार-पीट क़र्ज़ से अलग, सीधा पुलिस का मामला है — ११२ / FIR।

एक कदम आज

वसूली के हर फ़ोन और आने-जाने का तारीख़ वाला रिकॉर्ड रखें।

कहाँ जाएँ

  • RBI लोकपाल: cms.rbi.org.in (मुफ़्त; ऋणदाता के ३० दिन पूरे होने के बाद, ९० दिन के अंदर) • १४४४८।
  • बिना पंजीकरण वाले ऋणदाता और ऐप: sachet.rbi.org.in।
  • NBFC-MFI से क़र्ज़ लेने वालों के लिए: MFIN निःशुल्क नंबर १८००-१०२-१०८०; दूसरी संस्था सा-धन है।
  • साइबर वित्तीय ठगी: १९३० • cybercrime.gov.in • चक्षु / TAFCOP (sancharsaathi.gov.in)।
  • वसूली एजेंटों का आपराधिक बर्ताव: ११२ / नज़दीकी पुलिस (किसी भी थाने में ज़ीरो FIR) • मुफ़्त वकील के लिए DLSA १५१६।
  • असंगठित क्षेत्र की महिलाओं के लिए सहकारी रास्ता: सेवा (SEWA) / सेवा बैंक।
असली ज़िंदगी में
  • ख़ाली काग़ज़, अधूरा फ़ॉर्म, या जो आप पढ़ न सकें — उस पर कभी हस्ताक्षर नहीं। 'बस हस्ताक्षर कर दो, औपचारिकता है' से ही ज़मानत बना दी जाती है।
  • 'सिर्फ़ काग़ज़ पर' ज़मानतदार या साथ वाला क़र्ज़दार बनना — ज़िम्मेदारी काग़ज़ पर ही तो रहती है।
  • किसी और के क़र्ज़ के लिए अपना आधार और फ़ोटो दे देना।
  • स्वयं सहायता समूह या माइक्रोफ़ाइनेंस का क़र्ज़ आपके नाम पर, इस्तेमाल दूसरों का — चुकाने की ज़िम्मेदारी और चूक आपके रिकॉर्ड पर बैठती है।
  • रात को कॉल, बार-बार घर आना, पड़ोसियों के सामने बेइज़्ज़ती, रिश्तेदारों को फ़ोन — इनमें से हर एक शिकायत के लायक़ उल्लंघन है, 'आदत' नहीं।
  • 'एजेंट' को नक़द देना बिना रसीद के।
  • ऐसे लोन ऐप जो आपके संपर्कों और फ़ोटो का एक्सेस माँगें — यह ब्लैकमेल का जाना-पहचाना तरीक़ा है; RBI और संचार साथी की चेतावनी ख़ुद धोखाधड़ी वाले लोन ऐप से सावधान करती है (१२ अगस्त २०२६ को जाँचा गया)।
  • 'क़र्ज़ बंद हुआ है, सत्यापन के लिए' OTP बताना — वही तो ठगी है, क़र्ज़ बंद होना नहीं।
सँभाल कर रखें
  • हस्ताक्षर से पहले हर क़र्ज़ का काग़ज़ पढ़वा कर सुनें; जो हस्ताक्षर करें उसकी प्रति रखें।
  • वसूली के कॉल और घर आने का तारीख़ वाला हिसाब रखें (नंबर, समय, क्या कहा); संदेश सहेजें।
  • पहले अपने ऋणदाता के शिकायत अधिकारी को लिखित शिकायत — इसी से मुफ़्त RBI लोकपाल की ३० दिन वाली घड़ी शुरू होती है, और उसके बाद ९० दिन के अंदर आवेदन लगाना होता है।
  • उधार लेने से पहले ऋणदाता को सचेत पर जाँचें; बैंक, NBFC-MFI और SHG-बैंक का रास्ता बेहतर है।
  • खाते से ठगी में पैसा निकल जाए: तुरंत १९३० पर कॉल (गोल्डन आवर) और cybercrime.gov.in पर शिकायत।
  • ठगी वाले कॉल या SMS की शिकायत चक्षु पर (sancharsaathi.gov.in); अपने नाम की सिम TAFCOP पर जाँचें।

सेव करने से पहले सोच लें। फ़ोन किसी और के पास तो नहीं?

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यह जानकारी है, सलाह नहीं वकील ने जाँचा है जाँचा गया: १३ अगस्त २०२६